सोमवार, अगस्त 31

दिल का रिश्ता...







ये रिश्ते भी कितने अजीब होते हैं...



कुछ दूर...तो कुछ...
दूर रहकर भी करीब होते हैं...
कुछ को मांगते हैं हम अपनी दुआओं में
तो कुछ हमें किस्मत से नसीब होते हैं...




कितने अजीब है ये रिश्ते...
हम जानते हैं कि रिश्ता जो भी हो
हमें मिल ही जाएगा...
फिर भी...क्यों हम
दुआओं के लिए...झोली फैलाते हैं
दिल क्यों किसी से मिलकर खुश
और बिछड़कर जख्मी हो जाता है...
हम जानते हैं कि हमारे नसीब में जो भी हो...
हमें ख़ुद-ब-ख़ुद मिल ही जाएगा...
दिल को समझाना मुश्किल क्यों होता है...
ये दिल भी न जाने क्यों..
धोख़ा खाकर भी नहीं सुनता...
कमज़ोर दिलवालों..ज़रा ग़ौर से सुनें
दिल अगर धड़कता है किसी को देखकर
तो कृप्या अपने दिल का लैमिनेशन करा लें
भगवान ने सबको एक ही दिल तो दिया है
ख़ुदा-ना-खास्ता...गर टूट गया
तो कभी जुड़ता नहीं...बेहतर है..
पहले ही सतर्क हो जाएं...
इसलिए दिल को ज़रा संभाल कर रखें...
यहां-वहां भटकने न दें...
जब यहां-वहां फिरता है ये दिल..
तो आवारा कहलाता है...
और जब टूट जाए...ये दिल..
तो बेचारा बन जाता है...
लेकिन जब इससे कोई थोड़ी सी
हमदर्दी भरी बातें कर ले...
तो बस...उसी का हो जाता है...ये दिल
प्यार से ज़रा इसे कोई पुचकार ले
तो फफक-फफक कर...
अपनी व्यथा सुनाता है...ये दिल
ये दिल भी ना...
जाने कौन सा स्वाभिमान दिखाता है...
कि उससे एक शब्द नहीं बताता
जिसने इसे इतना छल्ली किया हो...
ये रिश्ता जब टूटता है..
कोई आवाज़ नहीं होती...
लेकिन इसका दर्द
पीढ़ियों तक दर्द छोड़ जाता है
ये ज़िंदगी भी हमें कितने रंग दिखाती है...
किसी से मिलाती है..
तो किसी से हमेशा के लिए जुदा कर जाती है
जब किसी से जुड़ता है ये दिल
तो उसी में अपनी सारी खुशियां तलाश लेता है
ये दिल...
दुनिया उतनी बड़ी भी नहीं..
जितना हम समझते हैं...
न जाने हमे किस मोड़ पे
फिर मिलाता है ये दिल...

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही दिल को छू लेने वाली कविता लिखी है.....
    प्यार करने वालों,प्यार पाने वालों और जिन्हें प्यार नहीं मिला सबके लिए कुछ न कुछ है इस कविता में...very romantic and heart touching....
    very nice

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  2. दुनिया छोटी है, एक आश्वस्ति है बिछड़ों से मिलन के लिए, लेकिन इसके उलट सांसें जो कम हैं...हक़ीक़त हैं....फिर कभी न...

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