रविवार, अक्तूबर 11

गलतियों से सीख


ग़लतियां किसी से भी हो सकती हैं...कभी भी हो सकती हैं...इंसान अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करता है कि उससे कोई ग़लती न हो...लेकिन जाने-अंजाने वो ग़लतियां कर बैठता है...ऐसा नहीं है कि आपके पास जानकारियों का अभाव होता है तभी आपसे गलतियां होती हैं...जानकारी होने के बाद भी कई बार जल्दबाज़ी में आप गलती कर बैठते हैं...लेकिन ग़लतियों पर मातम मनाने की ज़रूरत नहीं...जरूरत है तो उससे सीख लेने की ताकि भविष्य में वो गलती हम न दोहराए...
मैंने भी अब तक की अपनी पत्रकारिता की जिंदगी में कुछ गलतियां की हैं...जिन्हें मैं स्वीकार भी करती हूं...और मैंने इन गलतियों से सबक भी ली....मीडिया में छोटी-छोटी गलतियां भी काफी मायने रखती हैं...और आप एक शब्द की गलती से भी मुसीबत में फंस सकते हैं...इसलिए बेहद सतर्कता से काम करना पड़ता है...मेरी कुछ गलतियों ने मुझे काफी कुछ सिखा दिया....
मेरी पहली ग़लती...
एक बार मैं एक ख़बर बना रही थी...इसी बीच कोई दूसरी बड़ी ख़बर आ गई और अपनी पहली ख़बर को अधूरी छोड़ में दूसरी ख़बर लिखने में जुट गई...पहली खबर को मैंने पूरा नहीं किया था...मैंने क्लिप अटैच कर दिया था...तब तक उस खबर को बिना री-चैक किए उसे On Air कर दिया गया...उसमें एक गलती रह गई थी...खबर थी की उड़ीसा में हमला हुआ था और कुछ लोगों की मौत हो गई थी...इसपर उड़ीसा के मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था और प्रधानमंत्री ने पीड़ित परिवारों को राहत पैकेज की घोषणा की थी...Reuters में खबर आई थी और उसे ट्रांसलेट कर हिन्दी में ख़बर बनानी थी...मैंने खबर अधूरी लिखी...और मुख्यमंत्री की जगह मैंने प्रधानमंत्री लिख दिया...मैं ख़बर को रीचैक नहीं कर पाई थी और तब तक बुलेटिन प्रोड्यूसर ने अपने बुलेटिन में ख़बर को मुझसे बिना पूछे On Air कर दिया...तुरंत PCR से फोन आ गया की ख़बर ग़लत बनी हैं...मैं परेशान क्योंकि मुझे इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि अधूरी ख़बर को On Air कर दिया गया है...अब बारी थी हमारी क्लास लगने की...बॉस ने मुझे और BP को बुलाया मुझसे पूछा गया तो मैंने साफ बता दिया कि मैंने खबर अधूरी लिखी थी...उसे मेरी जानकारी के बगैर On Air किया गया...अब बारी थी BP और कॉपी चैक करने वाले की...मैं तो उस दिन बाल-बाल बच गई...इस गलती के बाद मैंने सीखा की कोई भी खबर अधूरी नहीं छोड़नी चाहिए औऱ अपना लिखा हमेशा चैक होने के बाद ही On Air होने देना चाहिए...
मेरी दूसरी ग़लती...
महाशिवरात्री के अवसर पर मुझे कुछ ब्रेकिंग ख़बर चलानी थी...मैंने ख़बर लिखी...On Air किया...मेरी शिफ्ट पूरी हो चुकी थी....मैंने ब्रेकिंग खबर आउट नहीं किया और मैं घर चली गई...मुझे लगा कि जो अगली शिफ्ट में आएगा वो इसे हटा ही देगा...पर ऐसा हुआ नहीं...उस ब्रेकिंग ख़बर पर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया...मैं रात के 12 बजे उस ख़बर को लगा कर गई थी और वो ख़बर पूरी रात ब्रेकिंग के तौर पर चलती रही...अगले दिन सुबह 10 बजे तक ख़बर ज्यों की त्यों चली...सुबह बॉस आए...वो ब्रेकिंग को बड़े ध्यान से देखते थे...सुबह जब उस ख़बर में कोई अपडेट नहीं पाया तो उन्होंने शिफ्ट के सभी कर्मचारियों को बुलाकर सबकी क्लास लगा दी...रात में रहे सभी लोग बुरी तरह फंस गए थे...किसी ने भी इस ओऱ ध्यान नहीं दिया था...जब दूसरे दिन मैं ऑफिस आई तो मुझसे भी पूछा गया कि आपने ख़बर लगाकर क्यों छोड़ दिया...मैंने अपनी गलती स्वीकार कर ली...और मैंने ये भी कहा की अगली शिफ्ट वालों को इस ओर ध्यान देना चाहिए On screen क्या जा रहा है उनकी पूरी जिम्मेदारी उनकी बनती है...मेरी शिफ्ट में ये बडी़ ख़बर थी इसलिए मैंने इसे लगाए रखा...ख़ै़र मुझे अपनी ग़लती भी स्वीकारनी पड़ी...
मेरी तीसरी ग़लती...
बुलेटिन में स्टोरी स्लग बड़े अक्षरों में लिखा जाता है....जिस मीडिया हाउस में उस वक्त काम कर रही थी उसमें ऐसा सिस्टम था कि पहले उसे दूसरी जगह लिखकर उसे कॉपी करना पड़ता था उसके बाद स्टोरी स्लग की जगह उसे पेस्ट करना पड़ता था...वैसे भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम काफी तेज़ी से करना पड़ता है...क्योंकि जब तक आप सोचेंगे समझेंगे और लिखेंगे तब तक समय खत्म हो चुका होगा...आपको...सोचना...समझना और लिखना एक साथ पड़ता है...इसलिए आपके पास समय की कमी पड़ जाती है...और आपकी नज़र जब तक अपनी गलती की ओर जाती है तब तक काफी देर हो चुकी होती है...
इस बार मैंने जो गलती की थी उसे अपनी पूरी जिंदगी नहीं भुला सकती....वाक्या ही कुछ ऐसा था...Business की ख़बर थी...एक स्टोरी स्लग आया था सेंसेक्स में भारी गिरावट...मैंने उसे लिखा...कॉपी किया...और स्टोरी स्लग की जगह पेस्ट कर दिया...मैंने उसे On Air किया और मैं दूसरा स्टोरी स्लग लिखने लगी...मेरा ध्यान उस ओर नहीं गया...
बुलेटिन ख़त्म हो गया और मुझे मेरी गलती का पता ही नहीं चला...इस बीच मैं अपने माता-पिता से मिलने 15 दिनों के लिए अपने घर मुज़फ्फरपुर चली आई...कुछ दिनों बाद मेरे एक सहकर्मी का फोन आया...उसका कहना था कि एक बुलेटिन में मैंने एक स्टोरी स्लग गलत लगाया था...मुझे याद नहीं था किस दिन मैंने गलती की...दरअसल उस पर तो किसी की नज़र नहीं गई लेकिन...जब भी कोई बुलेटिन On Air होता है तो उसकी गलतियों के लिए एक सेल बना होता है जो बुलेटिन की गलतियों को नोट करता है...बुलेटिन रिपोर्ट में वो गलतियां आ जाती हैं...मैंने सेंसेक्स को तो कॉपी किया था लेकिन इस शब्द में से पहला अक्षर मुझसे कॉपी नहीं हुआ था...अब तो अर्थ का अनर्थ बन गया था...मैं घर से लौटी...मैंने उस डेट का बुलेटिन रिपोर्ट चैक किया...मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ..मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई...मैं अबाक रह गई...ऐसा लग रहा था काटो तो खून नहीं...दिनभर मैं बेहद परेशान रही...बड़ी मुश्किल से मेरा वो दिन गुज़रा...मैं घर से लौटी थी सभी मुझसे मेरे घर के बारे में पूछ रहे थे...लेकिन मेरे दिमाग में मेरी गलती घूम रही थी...ऐसा लगा जैसे मुझे दिन में ही तारे नज़र आ रहे हों...हे भगवान ये मैंने क्या किया...
हालांकि ये बड़ा मुद्दा नहीं बना और इसपर मुझसे किसी ने कुछ पूछा भी नहीं...कम ही लोगों ने बुलेटिन रिपोर्ट चैक किया था...और उस वक्त बॉस भी छुट्टी पर थे...मामला रफ्फा दफ्फा हो गया...लेकिन मेरी इस गलती ने मुझे झकझोर कर रख दिया था...

2 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीया
    अभिवंदन
    आपके आर्टिकल के बारे में बस अपना एक दोहा लिखना चाहूंगा , शायद ई भी हों चाहिए....

    अनजाने की भूल पर, व्यक्त करे जो खेद
    उसकी निश्छल नियति पर कभी अन हो मत भेद'

    डॉ विजय तिवारी " किसलय "
    कवि, जर्नलिस्ट

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेनामीजनवरी 03, 2013

    mai bhi vahi hoo jo roj galti na karne ki kasam uthata hoo per phir bi galti karta hoo. by jagmer singh sharma phone 09417814964 e mail add:- sharma.jagmer@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं