सोमवार, सितंबर 6

क्या नाम दूं?

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इस जिंदगी को...
मैं क्या नाम दूं...?

कभी धूप कहूं कभी छांव कहूं
कभी सैलाबों का नाम मैं दूं
कभी जीत कहूं, कभी हार कहूं
कभी कुदरत का मैं प्यार कहूं

कभी शोर कहूं...कभी मौन कहूं
कभी खामोशी का जाम कहूं....

कभी गम की शाम कहूं
तो कभी इठलाती मुस्कान कहूं

कभी खुशियों का पैगाम कहूं
या जीवन का संग्राम कहूं!

17 टिप्‍पणियां:

  1. कभी खुशियों का पैगाम कहूं
    या जीवन का संग्राम कहूं
    ...yahi to jindagi hai.... vividh rangon se bhari....
    ..bahut sundar prastuti

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  2. उत्तर विहीन प्रश्न सुंदर रचना ,बधाई

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  3. wah ji wah kya khub likhti hain aap...u just create magic....
    mann karta hai...aapki rachna ke harek kadi ka aadha hissa...sada ke liye aapse chura lun....

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  4. मधु जी

    काश !
    सवालों के जवाब ढूंढ़े जा सकते तो परिदृश्य और ही होता …

    ऐसा करें ,
    इठलाती मुस्कान और खुशियों का पैगाम लिखदें , तो कैसा रहेगा ?
    बहुत शानदार !

    शुभकामनाओं सहित …
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  5. ज़िंदगी संग्राम ही है जहाँ हर तरह के अनुभव हैं ..सुन्दर अभिव्यक्ति

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  6. यही जीवन है... हर पल इसके नाम बदलते हैं...
    कभी हालात... तो कभी इंसान बदलते हैं...
    ''कभी पलकों पे आँसू हैं.. कभी लब पे शिकायत है.. मगर ऐ जिंदगी फिर भी.. हमें तुमसे मोहब्बत है..'' ये गाना सब कह देता है.
    पहली बार आपकी कविता पढ़ी, ये भी बहुत अच्छी लगी..

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  7. आपका ब्लॉग ११.९.२०१० के चर्चा मंच पर सजेगा.. देखिएगा जी..

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