गुरुवार, अक्तूबर 28

जीत होगी जरूर

हार...अंतिम पड़ाव नहीं
जीत का है वो पहला रास्ता


       जीत... होगी एक दिन जरूर
       क्योंकि है हमें पूरा हौसला

हार-जीत का खेल तो लगा रहेगा
जीतेगा वही...जो निरंतर चलता रहेगा...

       बाधाएं आएंगी पग-पग पर अनेक
       डटकर करना है उसका सामना

थक जाओ अगर...
तो कुछ पल के लिए ठहरना

     जिगर को मजबूती से थामना और
     हिम्मत से करना मुश्किलों का सामना

खुल जाएंगे खुद-ब-खुद सारे द्वार
और हो जाएंगे हम भवसागर के पार

1 टिप्पणी:

  1. हार अंतिम पड़ाव नहीं...ये बातें तो बहुत दिनों से सुनते आयें हैं....अब आदत सी हो गयी है...बस इंतज़ार है उस दिन का, जब कभी हमें लगे हम जीत गए हैं :)

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